मजदूर किसान विकास संस्थान

रामदेव प्रसाद ने अपने पिता के विचारों को क्रिया में अनुवाद करने के लिए एक संगठनात्म स्थान की महता और आवष्यकता का एहसास किया। इस बोध ने उन्हें दलितों के समग्र विकास के लिए एक संगठित तरीके से काम करने के लिए ए दष्य के साथ मजदूर किसान विकास संस्थान स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। जिसकी समस्या उनकी अगुवाई में विकास व न्याय के लिए पहल हो तो साकारात्मक परिणाम में ज्यादा ईमानदारी दिखती है, परन्तु ऐसा कम होता है। जो स्वंय सामाजिक संरचना व विकृति के पोषक है, ज्यादातर वही लोग दलित विकास की बात करते आ रहें है। संस्था हो या सामाजिक संगठन या फिर राजनीति संगठन सबके मुद्दे लगभग एक है, वो है, दलित-वंचित समुदाय के लोगो को समाज की मुख्य धारा से जोड़ना। अगर सरकार की बात की जाय तो दलित-वंचित समुदाय के लिए नियम, अधिनियम, योजनाएॅं कम नहीं है। देश आजादी के तत्यपश्चात सरकार, सामाजिक संगठन, व दाता संस्थाएॅ ंमुख्य रूप से इन्ही ंसमुदाय के लिए काम करते आ रही है। बावजुद इसके गैरबराबरी, बेकारी, भूखमरी, अत्याचार, हिंसा आदि असंख्य समस्याओं का दंश झेलने पर लोग मजबुर हैं। इससे साबित होता कि जिन्होंने हमारी अगुवाई किया है, उनमें से ज्यादातर लोग चालाकी किया है। उपरोक्त विन्दुओं को ध्यान में रखते हुए दलित अधिकार मंच द्वारा सी. डब्लू. एस. ने भूदान किसानो को बंजर भूमि को समतल कर खेती करने हेतू सितम्बर 2013 में सहयोग किया।जीविकोपार्जन के अलावा सरकार द्वारा चलाये जा रहे कल्याणकारी योजनाओं से जुडने की जानकारी देना, संगठित होकर आवाज उठाने का काम किया जा रहा है ताकि योजनाओं का सही लाभ वंचित समुदाय तक पहुंच सके।

 
विजनः-    दृष्टि जयप्रकाष नारायण के विष्वास और मूल्यों से प्रेरित न्यायपूर्ण, समतामूलक समाज की स्थापना जिसमें शांति, न्याय और समानता प्रवल हो।
 
 मिशनः-   विकास प्रक्रिया में लोेगों और उनके संगठन के शामिल होने से समाज के सतत विकास की दिषा में काम करता है। यह भी प्रकृति या मानव निर्मित या तो पीडित मनुष्य के लिए प्रतिक्रियाए।गाॅधी बिनावा, अम्बेदकर, लोहिया जयप्रकाष के विचार पर दलित मुक्ति आन्दोलन में सक्रीय रूप से नेतृत्व प्रदान करने का प्रयास करना।

 

 

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